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Pi Health:: अगर नए साल में रहना हैं दिल की बीमारियां से दूर, तो इन 4 योगासन का जरूर करें अभ्यास !!!

(Pi Bureau)

अनियमित दिनचर्या और खराब जीवन शैली के कारण लोगों में दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि काम के ज्यादा बोझ के कारण लोग एक्सरसाइज के लिए समय नहीं निकाल पाते हैं। ऐसे में आप चाहते हैं कि नए साल में दिल की बीमारियां आपसे कोसो दूर रहें और जीवनभर आप स्वस्थ रहें तो आपको रोज सुबह थोडड़ा समय निकाल कर इन योगासनों का अभ्यास करना होगा। योग के नियमित अभ्यास से फेफड़े मजबूत होते हैं और सांस लेने की प्रक्रिया बेहतर होती है। इतना ही नहीं योग के अभ्यास से उच्च रक्तचाप के समस्या में भी रीहत मिलती है।

त्रिकोणासन
त्रिकोणासन का अभ्यास करने के लिए अपने पैरों के बीच करीब तीन फीट की दूरी रखते हुए खड़े हो जाएं। अब आप दोनों हाथों और पैरों को समनांतर फैलाएं। इसके बाद दाएं पैर के पंजे को दाएं हाथ से छूने की कोशिश करें और बांया हाथ आसमान की ओर हो ताकि 90 डिग्री का कोण बनें। आप इसी मुद्रा में करीब 15 से 20 सेकंड तक रहें और सीधे हो जाएं। ठीक इसी विधि को दोहराते हुए अपने बाएं हाथ से बाएं पैर को छूएं।

पवनमुक्तासन
पवनमुक्तासन क्रिया का अभ्यास करना बहुत ही आसान है। सबसे पहले जमीन पर लेट जाएं और ध्यान रखें कि पैर दोनों एक सीध में हो और हाथ बगल में रखें हो। एक गहरी सांस लेकर उसे छोड़ते हुए अपने घुटनों को छाती की ओर ले आएं और जांघों को अपने पेट पर दबाएं। अपने हाथों को पैरों के चारों ओर इस तरह से जकड़ें जैसे कि आप अपने घुटनों को टिका रहे हों।

शवासन
शव अर्थात मुर्दा शरीर को मुर्दे समान बना लेने के कारण ही इस आसन को शवासन कहते हैं। इस आसन को करने के लिए पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को आराम से फैला लें। अपने पैरों के पंजों को बाहर और एडि़यों को अंदर की ओर रखें। अपने दोनों हाथों को शरीर से करीब 6 इंच की दूरी पर रखें। अपनी हाथों की अंगुलियां मुड़ी हुई, गर्दन सीधी रखें। इस आसन को करते समय अपनी आंखो को बंद रखें।

वृक्षासन
वृक्षासन के अभ्यास से केवल शरीर की बीमारियां ही ठीक नहीं होती बल्कि शरीर में जमा एक्स्ट्रा फैट भी बर्न होता है। इस आसन को करने के लिए पेड़ की तरह तनकर खड़े हो जाइए। शरीर का भार अपने पैरों पर डाल दीजिए और दाएं पैर को मोड़िये। दाएं पैर के तलवे को घुटनों के ऊपर ले जाकर बाएं पैर से लगाइये। दोनों हथेलियों को प्रार्थना मुद्रा में लाइये। अपने दाएं पैर के तलवे से बाएं पैर को दबाइये और बाएं पैर के तलवे को ज़मीन की ओर दबाइये। सांस लेते हुए अपने हाथों को सिर के ऊपर ले जाइये। सिर को सीधा रखिए और सामने की ओर देखिये। कुछ देर तक इस स्थिति में रुके रहें।

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