चारा घोटाला: कड़ी सुरक्षा के बीच सीबीआई कोर्ट में पेश हुए लालू, दर्ज कराया 313 का बयान !!!

(Pi Bureau)

Fodder Scam Case: राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने चारा घोटाले के डोरंडा कोषागार मामले में अपना बयान दर्ज करा दिया है। 139 करोड़ के इस घोटाले में लालू ने गुरुवार को अपना बयान रांची की विशेष सीबीआइ अदालत में दर्ज कराया। इससे पहले चारा घोटाले के चार मामलों के सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव पेशी के लिए दिन के 10 बजे रांची की सीबीआइ अदालत पहुंचे। यहां सीबीआइ अदालत के जज सुधांशु कुमार शशि के मौजूद नहीं होने से उन्‍हें करीब आधे घंटे तक इंतजार करना पड़ा। इस बीच लालू को टायलेट भी ले जाया गया।

लालू ने 110 वें आरोपित के रूप में डोरंडा कोषागर मामले में कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया। कोर्ट कैंपस में भारी सुरक्षा की व्‍यवस्‍था की गई है। लालू के सहयोगी भोला यादव भी उनके साथ हैं। चारा घोटाले के पांचवें मामले डोरंडा कोषागार से 139 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की मामले में गुरुवार को लालू अपना बयान दर्ज करा रहे हैं। सीबीआइ के विशेष जज सुधांशु कुमार शशि की अदालत में लालू की पेशी हुई है। इस बीच लालू को टायलेट भी ले जाया गया। लालू के वकील ने बताया कि डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी मामले में आइपीसी की धारा 313 के तहत बयान दर्ज कराया है।

इससे पहले बिरसा मुंडा जेल प्रशासन ने रांची के रिम्‍स से लालू को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट लाया। इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान सीबीआइ के विशेष जज एसके शशि ने रांची के डोरंडा कोषागार से 139 करोड़ रुपये की अवैध निकासी के मामले में 16 जनवरी (गुरुवार) को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राजद प्रमुख लालू प्रसाद का बयान रांची स्थित सीबीआइ अदालत में दर्ज कराने का आदेश बिरसा मुंडा जेल प्रशासन को दिया था।

11 गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए रांची के रिम्स में भर्ती हैं लालू प्रसाद यादव

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले के चार मामलों में अब तक सजा पा चुके हैं। उन्‍हें रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल में कैदी नंबर 3351 के रूप में रखा गया है। हालांकि 11 गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लालू को फिलहाल पुलिस अभिरक्षा में रांची के रिम्‍स में भर्ती कराया गया है। जहां पेइंग वार्ड में डॉक्‍टरों की टीम उनकी नियमित देखरेख कर रही है। लालू यादव को जहां चाईबासा और देवघर मामले में जमानत मिल चुकी है। वहीं दुमका कोषागार के दो मामले में सबसे अधिक सात-सात साल (कुल 14 साल) की सजा सुनाई गई है।

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