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जयंती विशेष:: जब इलाज कराने विदेश गए थे सुभाष और डॉक्टर की बेटी को दिल दे बैठे थे..!!!

(Pi Bureau)

आजाद हिंद फौज की स्थापना कर अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंकने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में भला कौन नहीं जानता! बोस के सार्वजनिक जीवन से इतर उनके जीवन के व्यक्तिगत और निजी पहलुओं के बारे में कम ही चर्चा होती है। सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर आज हम उनकी प्रेम कहानी की चर्चा करेंगे कि कैसे इलाज के लिए विदेश गए सुभाष एक डॉक्टर की बेटी को दिल दे बैठे थे:

साल 1934 में जब सुभाष अपना इलाज कराने के लिए ऑस्ट्रिया गए थे, उस समय उन्हें अपनी पुस्तक लिखने के लिए एक अंग्रेजी जानने वाले टाइपिस्ट की जरूरत थी। उनके एक मित्र ने एमिली शेंकल नाम की एक ऑस्ट्रियन महिला से उनकी मुलाकात कराई। एमिली के पिता एक प्रसिद्ध पशु चिकित्सक थे।

एमिली ने सुभाष के टाइपिस्ट के तौर पर काम किया। इसी दौरान सुभाष एमिली को दिल दे बैठे। एमिली भी उन्हें बहुत पसंद करती थीं। दोनों ने साल 1942 में बाड गास्टिन नामक स्थान पर हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कर लिया।

ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में एमिली ने एक पुत्री को जन्म दिया। बोस ने अपनी बेटी को पहली बार तब देखा जब वह एक महीने से भी कम की थी। उन्होंने उसका नाम अनिता बोस रखा था। अगस्त 1945 में ताइवान में हुई तथाकथित विमान दुर्घटना में जब सुभाष की मौत हुई, अनिता दो साल नौ महीने की थीं। अनिता बोस फाफ अपने पिता के परिवारजनों से मिलने कभी-कभी भारत भी आती हैं।

मालूम हो कि सुभाष चंद्र बोस का जन्म उड़ीसा राज्य के कटक शहर में 23 जनवरी, 1897 को हुआ था। कटक से प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई कलकत्ता यूनिवर्सिटी से की और विश्वविद्यालय में दूसरा स्थान हासिल किया।

उनके पिता आईसएएस बनाना चाहते थे पर बोस को अंग्रेजों की गुलामी में काम करना नामंजूर था। साल 1921 में बोस पहली बार महात्मा गांधी से मिले और इसके बाद सुभाष चंद्र बोस आजादी की लड़ाई का हिस्सा बने। उनके देशप्रेम को देखते हुए गांधी जी ने उन्हें देशभक्तों का देशभक्त कहा था।

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