यूपी:: न्याय की मांग को लेकर CM योगी से मिलने के लिए पैदल ही निकले संजीत के परिजन, पुलिस ने रोका तो…..!!!

(Pi Bureau)

उत्तर प्रदेश के कानपुर में संजीत यादव अपहरण एवं हत्याकांड में सीबीआई की जांच शुरू न होने पर शुक्रवार को संजीत के परिजन मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात करने के लिए पैदल निकल पड़े। रास्ते में नौबस्ता चौराहे पर पुलिस ने उन्हें रोक लिया। आक्रोशित मां बहन और पिता सहित अन्य लोग वहीं धरने पर बैठ गए।

मां वहीं लेट कर दहाड़े मारकर रोने लगीं। चीखने चिल्लाने लगीं। इसपर वहां मौजूद महिला पुलिस ने उन्हें किसी तरह समझाबुझाकर शांत कराया। वो बार-बार एक ही बात कह रहीं थी मेरे बेटे का शव तो दिला दो। संजीत की बहन ने कहा न अभीतक हमारी कोई मांग मानी गई है न ही हमारे भाई का शव पुलिस बरामद कर पाई है।

बता दें कि यूपी सरकार की ओर से सीबीआई जांच की सिफारिश किए जाने के बाद भी जांच न शुरू होने परिजनों में आक्रोश है। वहीं संजीत का शव भी अभीतक बरामद नहीं हुआ है। संजीत के परिजनों की मांग है कि तत्कालीन बर्रा इंस्पेक्टर रणजीत राय और पूर्व चौकी इंचार्ज राजेश कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर इनकी गिरफ्तारी की जाए।

मौके पर पहुंचे एसपी साउथ दीपक भूकर और एसीएम ने उन्हें समझाबुझा कर शांत कराया। परिजनों ने कहा कि संजीत अपहरण एवं हत्याकांड की निष्पक्ष जांच की जाए। सीबीआई को जांच ट्रांसफर किए जाने की खबर से परिजन खुश थे फिर खबर आई कि अभी बर्रा पुलिस ही इस मामले की जांच करेगी। बता दें कि अपहरण कांड के एक माह बाद पुलिस ने 21 जुलाई को संजीत के दो दोस्तों को पकड़कर खुलासा किया था।

पुलिस न तो अभी तक पांडु नदी से संजीत का शव बरामद कर सकी, न ही आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत जुटा सकी है। लैब टेक्नीशियन संजीत यादव का 22 जून को अपहरण हुआ था। 29 जून को उसके परिवार वालों के पास फिरौती के लिए फोन आया। 30 लाख रुपये फिरौती मांगी गई थी। परिवार वालों ने पुलिस की मौजूदगी में 30 लाख की फिरौती दी थी।

पुलिस अपहरणकर्ताओं को नहीं पकड़ पाई और न संजीत यादव को बरामद किया गया। 21 जुलाई को जब पुलिस ने सर्विलांस की मदद से संजीत के दो दोस्तों को पकड़ा तो पता चला कि उन लोगों ने संजीत की 26 जून को ही हत्या कर दी थी। शव को पांडु नदी में फेंक दिया गया था। इसके बाद सीएम योगी के निर्देश पर इस मामले में एक आईपीएस समेत 11 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया था। पुलिस ने पांडु नदी में कई बार लगातार सर्च अभियान चलाया, लेकिन संजीत का शव हाथ नहीं लगा।

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