दोहा में शुरू हुई तालिबान और अफगान सरकार के बीच वार्ता, नाटो चीफ ने कहा- ‘ऐतिहासिक मौका’ !!!

(Pi Bureau)

दोहा की राजधानी कतर में शनिवार को अफगानिस्तान में जारी हिंसा के बीच तालिबान और अफगान सरकार की शांति वार्ता शुरू हो गई है। NATO प्रमुख स्टोलटेनबर्ग (Stoltenberg) ने अफगान शांति वार्ता का स्वागत किया और इसे ‘ऐतिहासिक मौका’ बताया है। पूर्व चीफ एक्जीक्यूटीव अब्दुल्ला अब्दुल्ला जो अफगानिस्तान के लिए शांति वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं उन्होंने तत्काल प्रभाव से सीजफायर पर जोर दिया और जारी जंग में होने वाली मौतों का जिक्र करते हुए कहा कि फरवरी में अमेरिका और तालिबान के बीच शांति वार्ता समझौते पर हस्ताक्षर के बाद से अब तक 12 हजार नागरिक मारे जा चुके हैं और 15 हजार जख्मी हैं

वार्ता के लिए तालिबानी प्रतिनिधिमंडल कतर की राजधानी दोहा स्थित होटल में मौजूद हैं जहां करीब दो दशक से चल रहे जंग को खत्म करने के लिए वार्ता होगी। दोहा में वार्ता के शुभारंभ के मौके पर अब्दुल्ला ने कहा, ‘हमें यह अनोखा मौका शांति के लिए इस्तेमाल करना है।’ हमें हिंसा को रोकना होगा और जितनी जल्द हो सके सीजफायर पर सहमति देनी होगी। हम सीजफायर चाहते हैं।

शांति वार्ता की सफलता से करीब 19 साल बाद अमेरिका और नाटो सैनिकों की अफगानिस्तान से वापसी का रास्ता साफ होगा। दोहा में हो रही रही वार्ता में अफगान सरकार द्वारा नियुक्त वार्ताकार और तालिबान का 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भाग ले रहे हैं।

फरवरी में हुई थी डील

वार्ता की शुरुआत के मौके पर अब्दुल्ला के साथ तालिबान के सह-संस्थापक मुल्ला अब्दुल गनी बरादर और अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो भी मौजूद थे। फरवरी में कैदियों की रिहाई के आधार पर अमेरिका समर्थित यह शांति समझौता निर्धारित समय से 6 माह देरी से शुरू हुआ है। यह वार्ता 9/11 हमले के 19वीं बरसी के एक दिन के बाद हो रहा है जिस हमले ने अमेरिका को अफगानिस्तान पर हमला करने और तालिबान को खत्म करने के लिए उकसाया जिसने अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को पनाह दे रखा था।

वार्ता के जरिए इन मुद्दों को सुलझाने का प्रयास

वार्ता की औपचारिक शुरुआत के बाद दोनों पक्ष कठिन मुद्दों को सुलझाने का प्रयास करेंगे। इनमें स्थायी संघर्ष विराम की शर्तें, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकार तथा दसियों हजार तालिबान लड़ाकों का निरस्त्रीकरण शामिल है। दोनों पक्ष संवैधानिक संशोधनों और सत्ता बंटवारे पर भी बातचीत कर सकते हैं। यह बातचीत नवंबर में अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले ट्रंप प्रशासन द्वारा संचालित अनेक कूटनीतिक गतिविधियों में एक है।

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