…….पिसेगा तो सिर्फ टीचर और गरीब का बच्चा !!!

(Pi Bureau)

 

अगर ये सारे सुधार शिक्षा जगत में हुए तभी जमीनी बदलाव संभव है। बाकि जब तक मुलभुत समस्याओं को नही समझा जायेगा पिसेगा सिर्फ टीचर और गरीब का बच्चा।

महापुरूषों के नाम पर जैसा की योगी जी ने कहा छुट्टियां नही होनी चाहिए यक़ीनन एक बेहतर कदम है लेकिन उसके साथ ही साथ कुछ और अहम् कदम भी सरकार को तत्काल उठाने चाहिए

— सभी बेसिक और माध्यमिक शिक्षको को उनके गृह जनपद या में और अगर संभव न हो तो करीबी जनपद के करीबी ब्लॉक में भेज दे।

— स्कूलों में मिड डे माल की ज़िमेदारी निजी संस्था को तत्काल दे दी जाये।

— गाँव गाँव छप्पर में चल रहे बिना मान्यता वाले स्कूलों को तत्काल बंद कर दिया जाये। तभी बच्चो की संख्या बढ़ेगी।

— ड्रेस बैग थाली जूता मोजा स्वेटर आदि का वितरण बच्चो की 60% बॉयोमेट्रिक हाजिरी के आधार पर बी आर सी से किया जाये।

— बच्चो और अध्यापक की हाजिरी बॉयोमेट्रिक से ली जाये और लगातार शिक्षक अगर 3 दिन लेट से आये तो वेतन काटने का नियम हो।

— शिक्षको का वेतन हर दशा में 5 तारिख तक सरकार दे दे।

— स्कूल की पुताई फर्श और पानी के लिए ग्राम पंचायत अधिकारी या सेकेट्री ज़िमेदार हो।

— अध्यापको को जीन्स पे रोक लगा देनी चाहिए और महिलाओं को भी सूट या साड़ी अनिवार्य कर देना चाहिए।

— हर तरह के अवकाश ccl, cl मेडिकल मेटरनिटी के लिए बी आर सी न जाकर केवल बॉयोमेट्रिक में बटन दबाना हो।

— सफाई कर्मी रोज स्कूल आये ये निश्चित करे सरकार

दूर दराज के स्कूलों में जहाँ साधन उपलब्ध नही है या बेहद भिहड़ में है वहाँ महिलाओं की नियुक्ति सरकार न करे और सुविधा को देखते हुए वहाँ समय भी परिवर्तित करे सरकार।

— अध्यापक पर कोई भी कार्यवाही करने से पहले उसे अपनी पूरी बात लिखित में रखने का हक़ होना चाहिए।

— अगर सरकार बच्चो को क्षत्रवृति देना चाहे तो बॉयोमेट्रिक हाजरी के आधार पर सीधे उनके खाते में दे।

— किताबो का वितरण स्कूल से करवाया जाए लेकिन किताबे जुलाई में स्कूल पे आ जाये।

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