मोदी का मंत्रिमंडल विस्तार, यूपी में अगड़ों पिछड़ों को साधने की कवायद(विश्लेषण)   

(Pi Bureau) लखनऊ : उत्तर प्रदेश के लिहाज से राजनीतिक चतुराई से परिपूर्ण रहा मोदी मंत्रिमंडल का तीसरा विस्तार. करीब डेढ़ साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर रविवार को हुए मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार में 2019 की तैयारी के लगभग सभी समीकरण शामिल हैं. बीजेपी 2017 के विधानसभा चुनाव में पाले में आये मतों को सहेजने में जुटी है. भाजपा ने इस तीसरे कबिनेट विस्तार के जरिये पूर्वांचल के मतदाताओं के साथ ही साथ ब्राह्मण मुस्लिम और जाटों को भी साधने की कोशिश की है.

प्रदेश के करीब 12 फीसदी ब्राह्मण मतदाताओं को पाले में लाने के लिए बीजेपी ने पहले एक ब्राह्मण उप मुख्यमंत्री फिर ब्राह्मण प्रदेश अध्यक्ष और अब केंद्रीय मंत्रिमंडल में पूर्वांचल के एक ब्राह्मण चेहरे को शामिल कर लिया है. बताते चलें कि कांग्रेस समर्थक ब्राह्मण मतदाता मंडल आयोग के बाद बीजेपी में गया और बाद में बसपा में चला गया था. लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में ब्राह्मण भाजपा के साथ खड़ा हुआ.

पूर्वी यूपी से ताल्लुक रखने वाले महेंद्र नाथ पाण्डेय को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर और एक ब्राह्मण को उपमुख्यमंत्री बनाने के बाद अब गोरखपुर से राज्यसभा सांसद शिव प्रताप शुक्ल को राज्यमंत्री के रूप में शपथ दिलवाई गयी. जानकारों की मानें तो शिवप्रताप के रूप में मोदी ने एक तीर से दो निशाने लगाये हैं. योगी आदित्यनाथ को यूपी का मुख्यमंत्री और शिवप्रताप को केंद्र में मंत्री बनाकर पूर्वी यूपी में ठाकुर-ब्राह्मण समीकरण को साधा है और इससे योगी पर क्षत्रिय संरक्षण के लग रहे आरोप पर भी काफी हद तक लगाम लगेगी. शिवप्रताप के ताकतवर होने के साथ ही पूर्वांचल का ब्राह्मण भी लामबंद होगा और ऐतिहासिक रूप से उस क्षेत्र में क्षत्रिय और ब्राह्मण दो विपरीत ध्रुव रहे हैं.

समाजवादी पार्टी के पूर्व कद्दावर मंत्री व चर्चित नेता आजम खान के जिले रामपुर से ताल्लुक रखने वाले मुख्तार अब्बास नकवी को कबिनेट मंत्री बनाकर मुस्लिम मतदाताओं को भी सन्देश देने का काम किया है कि भाजपा मुस्लिम विरोधी नहीं है. जबकि सपा और आजम खान भाजपा को हमेशा मुस्लिम विरोधी बताते रहे हैं. इसके अलावा मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर व पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत से सांसद सत्यपाल सिंह जिन्होंने पिछले चुनाव में आरएलडी के मुखिया अजित सिंह को हराया था, को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करके जाटलैंड के मतदाताओं को सन्देश देने की कोशिश की है. इस तरह से विधानसभा चुनाव में पार्टी के पाले में आये दलित, पिछडे, जाट और सवर्ण मतदाताओं को रिझाने की कवायद के तौर पर मोदी के इस मंत्रिमंडल के विस्तार को देखा जा सकता है.

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