JNU छात्रसंघ चुनाव: चारों सीट पर UL का कब्जा, गीता कुमारी बनीं अध्यक्ष

(Pi Bureau) दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के केन्द्रीय पैनल के लिए हुए चुनाव में यूनाइटेड लेफ्ट ने बाजी मारी और सभी चारों पदों पर विजय हासिल की। निर्वाचन पैनल के अधिकारियों ने बताया कि कल रात साढ़े नौ बजे शुरू हुई मतगणना के परिणाम देर रात घोषित किए गए। छात्रसंघ चुनाव में गीता कुमारी अध्यक्ष पद पर जीती हैं।

गीता कुमारी हरियाणा की रहने वाली हैं। उनकी जीत पर उनके परिवार के लोग भी खुशियां मना रहे हैं। पढ़ने में मेधावी गीता इतिहास से एमफिल कर रही हैं। जीत के बाद गीता कुमारी ने कहा कि मैं इस जश्न के मौके का श्रेय जेएनयू के उन छात्रों को देती हूं जो मानते हैं कि यह इस जैसी लोकतांत्रिक जगह को बचाए रखने की जरूरत है। मैंने प्रचार में जेएनयू की सीटों में कटौती, नजीब की गुमशुदगी, नए हॉस्टल और प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाया था।

आइसा, एसएफआई और डीएसएफ के संयुक्त गठबंधन लेफ्ट यूनिटी की संयुक्त उम्मीदवार गीता कुमारी ने 1506 वोट लेकर एबीवीपी की निधि त्रिपाठी (1042) को हराया। शनिवार देर रात आए चुनाव परिणाम के बाद पूरा जेएनयू कैंपस नारों से गूंज उठा। ढोल नगाड़ों के बीच विजयी दलों के छात्र झूमते गाते हुए दिखे। सेंट्रल पैनल की चारों सीट पर लेफ्ट यूनिटी ने कब्जा किया।

लेफ्ट यूनिटी की ओर से गीता कुमारी के अलावा सिमोन जोया खान ने उपाध्यक्ष, दुग्गिराला श्रीकृष्ण ने महासचिव तो शुभांशु सिंह ने संयुक्त सचिव पद पर जीत हासिल की।

उपाध्यक्ष के लिए सिमोन जोया खान ने 1876 वोट हासिल कर एबीवीपी के दुर्गेश (1028) को हराया। वहीं महासचिव पद पर दुग्गिराला श्रीकृष्ण ने 2082 वोट लेकर एबीवीपी के निकुंज मकवाना (975) को और संयुक्त सचिव के लिए शुभांशु सिंह ने 1755 वोट हासिल कर एबीवीपी के पंकज केसरी (920) को मात दी।

एनयूएसयू चुनाव समिति के अनुसार कुल 7,903 मतदाताओं में से 4,639 ने वोट डाला और इस तरह 58.69 प्रतिशत मतदान हुआ. पिछले वर्ष 59.60 प्रतिशत मतदान हुआ था। छात्र संघ के अध्यक्ष पद के लिए सात उम्मीदवार चुनावी मैदान थे। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले चुनाव में भी अध्यक्ष सीट पर आइसा का कब्जा था। इस बार भी अध्यक्ष पद पर विजयी हुईं गीता आइसा की ही हैं।

नएसयूआई को नोटा से कम वोट
कांग्रेस के छात्रसंगठन एनएसयूआई ने जेएनयू छात्रसंघ चुनाव के लिए केंद्रीय पैनल के चारों पदों पर प्रत्याशी उतारे थे। दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में जहां एनएसयूआई बेहद सक्रिय रहता है वहीं जेएनयू में संगठन के समर्थकों की संख्या बेहद कम दिखी। इसका असर चुनाव परिणाम पर भी पड़ा एनएसयूआई की अध्यक्ष पद की प्रत्याशी वृषनिका को नोटा से भी कम वोट मिले।

खबर लिखे जाने तक जहां वृषनिका को 59 वोट मिले थे वहीं नोटा को 90 वोट मिले थे। छात्र संघ के चुनावों में संगठन के कैडरों की संख्या बड़ी भूमिका निभाती है। पिछले कुछ सालों में बेहतरीन भाषाण देने वाले कई प्रत्याशी इसलिए चुनाव हार गए कि उनका संगठन परिसर में बेहद कमजोर था।

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