कोरोना काल में भी काँच के मोतियों की चमक नही फीकी होने दी बनारस बीड्स ने!!!

अजय मिश्रा,संवाददाता

(Pi Bureau)

वैश्विक महामारी कोरोना कारण एक तरफ पूरी दुनिया में लॉकडाउन के चलते उद्योग धंधे प्रभावित हुए जिसमे कई व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद हो गए और कई उद्योगों में हजारों कर्मचारियों की छंटनी भी हुई है, लेकिन वही बनारस बीड्स लिमिटेड ने रोजगार के अवसर प्रदान किए। कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि हमारी मजबूत बुनियादी बातों और कंपनी में विदेशी खरीदारों के भरोसे को दर्शाता है। रिश्ते और विश्वास किसी भी कंपनी के लिए सबसे कीमती संपत्ति है और शेयरधारकों का विश्वास पहले की तुलना में बहुत मजबूत होता है, जब आपकी कंपनी बढ़ेगी तो कंपनी से जुड़े सभी लोग बढ़ेंगे।

कांच की मोतियों के सबसे बड़े उत्पादक व निर्यातक बनारस बीड्स लिमिटेड द्वारा वाराणसी में आयोजित वार्षिक आम बैठक में कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अशोक कुमार गुप्ता ने कहा कि वैश्विक महामारी कोविड -19 के दूसरे वर्ष में भी विभिन्न परेशानियों से संघर्ष करते हुए बनारस बीड्स लिमिटेड ने मजबूती से अपनी स्थिरता बनाते हुए यह साबित कर दिया कि कंपनी किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है, यह सब कंपनी के मजबूत इरादों और सकारात्मक सोच और दृढ़ संकल्प से संभव हो सका और हम वैश्विक रिश्ते और विश्वास के बल पर आगे बढ़ते हुए चीन से कारोबारी प्रतिस्पर्द्धा कर रहे है और इस संघर्ष में सरकार को उद्यमियों का साथ देना चाहिए। बताया कि वर्ष 2019-20 में कंपनी की सकल आय 23.56 करोड़ थी जो वर्ष 2020-21 में घट कर 19.42 करोड़ रह गई, जिसका मुख्य कारण वर्ष 2020-21 में लॉकडाउन की वजह से कंपनी में उत्पादन 8-9 महीने रहा, पिछले दो वर्षो में कोई विदेशी मार्केटिंग टूर नहीं हुआ कोई नया ग्राहक नहीं बढ़ा, किसी भी व्यापार मेले में भाग नहीं ले पाए जिसके चलते भी कारोबार 19 प्रतिशत प्रभावित रहा, तो वही इस तरह के अतिरिक्त व्यय नहीं होने से कंपनी का शुद्ध लाभ भी बढ़ गया। वही उन्होंने कहा कि बिना किसी सरकारी प्रोत्साहन के जीआई पंजीकृत हस्त निर्मित कांच के मोती 10.67 करोड़ रुपए, लकड़ी के मोती 60.76 लाख रुपए, सॉफ्ट स्टोन के आर्टिस्टिक मोती 12.28 लाख रुपए और 4.71 लाख रुपए के टेरीकोटा के मोतियों का निर्यात किया।

उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव से कंपनी के आर्डर बुक में 30 प्रतिशत की वृद्धि का अवसर मिला है क्योंकि चीन से अमेरिका में आयात करने पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क में वृद्धि होने से भारतीय उत्पादों का निर्यात अमेरिका में बढ़ना शुरू हो गया है। इसका असर कंपनी के चालू वित्तीय वर्ष की रिपोर्ट में दिखाई पडेगा। उन्होंने कहा कि हम बेहद आशावादी हैं और विश्वास करने के कई कारण ही कंपनी सफलता के मार्ग प्रशस्त हुए है, और यह आगे भी जारी रहेगा चाहे कोई प्रतिकूल स्थिति हो तो भी कंपनी का सालाना बेहतर प्रदर्शन होता रहेगा और कंपनी विकास के मार्ग पर आगे बढ़ती रहेगी।

अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने बताया कि भारत कांच की मोतियों का पिछले दशक तक नेट निर्यातक था एवं भारत वर्ष से जितना निर्यात होता था उससे ज्यादा कांच की मोतियों की खपत “इमिटेशन ज्वैलरी, जपने की माला, मंगलसूत्र ” इत्यादि में होता था, निर्यात से 100 गुना माल घरेलू बाजार में बिक जाता था, दुर्भाग्य से चीन के ड्रैगन की नजर भारत के इस उद्योग पर पड़ी और कांच के मोतियों की चमक फीकी पड़ गई, प्रतिस्पर्धा में भारत में ही स्वदेशी कांच की मोतियों का कारोबार शून्य हो गया क्योंकी भारत में मोतियों के कारोबार में चीन का अधिपत्य हो गया। पिछले तीन वर्षो के आकंड़ो के अनुसार भारत में चीन से प्रतिवर्ष औसतन 800 करोड़ रुपए का औसत 30 हजार टन कांच की मोतियों का विदेशी मुद्रा में आयात हुआ जो कुल आयात का लगभग 85 प्रतिशत है और इस पर 800 करोड़ रुपए विदेशी मुद्रा प्रतिवर्ष खर्च होती है। उन्होंने कहा कि फिर भी समझ नहीं आता कि भारत सरकार अपना राजस्व क्यों नहीं बढ़ाना चाहती। वही इन्ही हालातो के कारण कम से कम 20 पंजीकृत व्यापारियों और उद्योगों ने कार्य बंद कर दिया और 10 हजार से ज्यादा कारीगर बेकार हो गए।

अशोक कुमार गुप्ता ने कहा कि पिछले कई वर्षो से यहां के उद्यमी और उनके संगठनो द्वारा पिछले 5 वर्षो से सरकार से गुहार लगाती आ रही है कि वर्तमान में भारत में कांच के मोती पर आयात शुल्क 20 प्रतिशत है जिसे बढाकर 45 प्रतिशत कर दिया जाए तो लगभग 200.00 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सीमा शुल्क मिलेगा, उन्होंने कहा कि हमारा सुझाव है कि केंद्र और राज्य सरकारें जीआई उत्पादों को निर्यात के लिए प्रोत्साहित करे और स्थानीय उद्योगों को बचाते हुए अपने राजस्व में इजाफा करे जिससे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार हो सकें। उन्होंने आगे कहा कि यदि इस पर आयात शुल्क में वृद्धि हो या एंटी डंपिंग शुल्क लगा दिया जाए तो भारत सरकार राजस्व बढ़ जाएगा और उत्तर प्रदेश में कम से कम दस हजार लोगो को पुनः रोजगार मिल सकता है जो कि अब बेरोजगार हो गए है एवं 800 करोड़ की विदेशी मुद्रा भी बचेगी।

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